आपको एक शोध अध्ययन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि बचपन में हुए कुछ कठिन अनुभव किस प्रकार वयस्क जीवन में हमारे स्वास्थ्य और जीवनशैली को प्रभावित कर सकते हैं। भारत में इस विषय पर सीमित शोध होने के कारण, इस अध्ययन में आपकी भागीदारी बहुत मूल्यवान होगी। कृपया नीचे दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें। आपकी भागीदारी और इस अध्ययन के निष्कर्ष मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए ज्ञान को बढ़ाने और बेहतर सहायता कार्यक्रम विकसित करने में मदद करेंगे। कृपया ध्यान दें कि आप इस अध्ययन में केवल तभी भाग ले सकते हैं यदि आपकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है।
यदि आप भाग लेना चाहते हैं, तो कृपया अगले पृष्ठ पर दिए गए फॉर्म में अपनी सहमति दर्ज करें। सहमति देने के बाद, आपको कुछ प्रश्नावली भरने के लिए कहा जाएगा, जिसमें लगभग 15 मिनट लगेंगे। शोध के नैतिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस फॉर्म में दी गई आपकी जानकारी पूरी तरह से पहचान रहित (अनाम) है और सभी उत्तर को गोपनीय रखा जाएगा। कृपया ध्यान दें कि इस अध्ययन में भाग लेना पूरी तरह से स्वैच्छिक है। यदि आप चाहें, तो आप किसी भी समय — अध्ययन के बाद या प्रकाशन से पहले — बिना किसी कारण बताए अपनी जानकारी वापस ले सकते हैं।
फॉर्म भरना शुरू करने के बाद, कृपया टैब को बंद न करें या इसे लंबे समय तक ना छोड़ें, क्योंकि ऐसा करने से फॉर्म अपने आप बंद हो सकता है।
हालांकि हमें किसी गंभीर जोखिम की उम्मीद नहीं है, फिर भी यदि बचपन के अनुभवों के बारे में सोचने से आपको भावनात्मक असुविधा महसूस हो, तो आप किसी भी समय सर्वे को रोक सकते हैं या सहायता ले सकते हैं। सर्वे के अंत में आपको हेल्पलाइन नंबरों की सूची दी जाएगी, ताकि यदि आप चाहें तो अतिरिक्त समर्थन प्राप्त कर सकें।
यह शोध परियोजना मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी, दुबई की एथिक्स कमेटी द्वारा मंज़ूर की गई है। हमारे अध्ययन में रुचि दिखाने के लिए धन्यवाद। यदि आपके कोई प्रश्न या सुझाव हों, तो कृपया नीचे दिए गए ईमेल पते पर हमसे संपर्क करें। आपके समय और सहयोग के लिए हम आभारी हैं।
संपर्क:
अकांक्षा चंदेले — akanksha@iamwellbeing.in
अतूफ़ा खान — atufa@iamwellbeing.in
डॉ. निष्ठा लांबा — N.Lamba@mdx.ac.ae
एनास शुएब— enasshuaib2@gmail.com